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Pyar Se Pyara Pyar

Posted In Poetry - By NitiN Kumar Jain On Thursday, May 29th, 2008 With 4 Comments

तेरे बिना यह दुनिया सूनी लागे रे
तेरे बिना यह आँखे सारी रात जागे रे
जहा देखु उठा के नज़र
हर चेहरा तेरा चेहरा लागे रे

मोहब्बत की इन्तेहा महसूस करते है
तेरे बिना एक एक पल
कई कई बार मरते है
अपना सब कुछ देदु आपको
मेरे आंसू ना चले जाए डरते है




मेरा प्यार दूर है
कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों के साथ
यह दिल क्या चाहे
बस दो घड़ी अपने प्यार से मुलाक़ात
लेकर उसका हाथो में हाथ
चार पल प्यारी बात
पूरी रात

फूलों में खुशबू है
मेरी जान सा कहाँ
फिजाओ में रंगत है
मेरी जान सा कहाँ
दरिया सा दिल
मेरी जान सा कहाँ
चाँद की चांदनी
मेरी जान सा कहाँ

ज़िंदगी के मायेने बदले
जब तुम मिले
चेहरे ने रंग बदले
जब तुम खिले
छोड़ के दुनिया के सारे गिले
आओ एक सपना देखे
जहाँ आँखें बतियाये
और हो होंठ सिले

तेरी आंखो में डूब जाना चाहता हूँ
तेरे होंठो का सारा रस पी जाना चाहता हूँ
खो जाऊँ इस पल में इस तरह की
यह पल तेरे पलको में जी जाना चाहता हूँ

-एन के जे

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Displaying 4 Comments
Have Your Say

  1. Piyush says:

    thats truly said Nitin..but why is it so that the feeling are which u have described are always from one side,..thats a general concept to be seen everywhere..but as u said

    मेरा प्यार दूर है
    कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों के साथ

  2. Piyush says:

    thats truly said Nitin..but why is it so that the feeling are which u have described are always from one side,..thats a general concept to be seen everywhere..but as u said

    मेरा प्यार दूर है
    कुछ खट्टी कुछ मीठी बातों के साथ

  3. क्या बात है नितिन भाई.. बहुत रोमांटिक सी कविता लिखी है..
    आज ऐसा प्यार कैसे उमड़ पड़ा??

    वैसे अगर भावों को शब्दों में डालने की बात है उस लिहाज से कविता अच्छी है.. कुछ पंक्तियाँ काफी अच्छी हैं..

    पर यदि कविता की बात करें तो कसावट बाकि है..
    नीचे की लाइन में:
    फूलों में खुशबू है
    मेरी जान सा कहाँ
    फिजाओ में रंगत है
    मेरी जान सा कहाँ
    दरिया सा दिल
    मेरी जान सा कहाँ
    चाँद की चांदनी
    मेरी जान सा कहाँ

    फूलों की खुशबू, फिजाओं की रंगत. चाँद की चाँदनी स्त्रीलिंग है.इसलिये “सा” की जगह “सी” आयेगा…

  4. क्या बात है नितिन भाई.. बहुत रोमांटिक सी कविता लिखी है..
    आज ऐसा प्यार कैसे उमड़ पड़ा??

    वैसे अगर भावों को शब्दों में डालने की बात है उस लिहाज से कविता अच्छी है.. कुछ पंक्तियाँ काफी अच्छी हैं..

    पर यदि कविता की बात करें तो कसावट बाकि है..
    नीचे की लाइन में:
    फूलों में खुशबू है
    मेरी जान सा कहाँ
    फिजाओ में रंगत है
    मेरी जान सा कहाँ
    दरिया सा दिल
    मेरी जान सा कहाँ
    चाँद की चांदनी
    मेरी जान सा कहाँ

    फूलों की खुशबू, फिजाओं की रंगत. चाँद की चाँदनी स्त्रीलिंग है.इसलिये “सा” की जगह “सी” आयेगा…