Naa Jaane Kyon

Posted In Poetry - By NitiN Kumar Jain On Tuesday, June 3rd, 2008 With 4 Comments






Pin It


चाहा चलना जब भी दो कदम
रुक गए पाँव ना जाने क्यों
चाहा देखना जब भी गगन को
झुक गई नज़रे ना जाने क्यों

कभी ना किसी को रुलाया
रोया पर मैं ना जाने क्यों
साथ था सबके हर कदम
खोया पर मैं ना जाने क्यों

दर्द बाटा हमेशा सबका
सहा पर अकेले ना जाने क्यों
जीना चाहता था ज़िंदगी को
पर इसके झमेले ना जाने क्यों

-एन के जे