Dard

Posted In Poetry, Thoughtworks - By NitiN Kumar Jain On Tuesday, May 27th, 2008 With 1 Comment






Pin It


दर्द वह नही जो तेरा है …
दर्द वह भी नही जो मेरा है …
दर्द को अपनी उल्फत ना समझो …
दर्द वह इबादत है जो दूसरो का हो तो हमारा है ..

कितनी पास होकर भी दूर हो तुम …
दिल का एहसास होकर भी मजबूर हो तुम …
ना समझ सके जो मेरे दिल की चाह …
क्या मेरे दिल का सिर्फ़ एक फितूर हो तुम …

तेरा दिल जो चाहे वह मैं नही जानता …
मेरा दिल क्या चाहे उससे तू अनजान है …
मैंने ही कहा खुशी दी है तुझको …
जो तुझसे खुशी पाने का अरमान है …

प्यार ना कहे कर ना किया जाए तो नागुवार लगता है …
प्यार कहे कर ना किया जाए तो दुशवार लगता है …
प्यार कहा जाए और किया जाए तो गुलज़ार लगता है …
प्यार ना कहे कर किया जाए तो प्यार लगता है …

मुझे अपने लिए जीना नही आता …
मैं अपने लिए जीना नही चाहता …
चाहता हूँ प्यार जो मेरी इस चाहत को अपना सके …
खता तो उसकी भी नही जो उसने जीना चाहा …
खता तो मैंने की जो उसको ना समझ पाया …

– एन के जे

Tags: ,