Kadva Sach

Posted In Poetry, Thoughtworks - By NitiN Kumar Jain On Saturday, May 31st, 2008 With 1 Comment






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क्यों खुली आंखों से आज सच नही दिखता
क्यों आज इस दुनिया में प्यार भी है बिकता
क्यों इंसानों ने इंसानों की कीमत है लगाई
क्यों आज खुशियों में बजती नही शेहनाई
क्यों नही बहता झरना आज किसी की प्यास भुझा पता
क्यों सिर्फ़ मुसीबत की घड़ी में है खुदा याद आता
क्यों मजबूरन आज मैं इतना कुछ लिखता
क्यों खुली आंखों से आज सच नही दिखता
क्यों खुली आंखों से आज सच नही दिखता

यह कविता मैंने १४ अक्टूबर २००३ में लिखी मैं कुछ दिनों से अपने लेख ढूँढ रहा था अपने कंप्यूटर में और आज भाग्ये से मैं इसको ढूँढ पाया और इसको ब्लॉग में प्रकाशित कर रहा हूँ ना जाने क्यों अपनी सारी कृतिया ब्लॉग पर डालना चाहता हूँ शायद इसलिए ताकि एक जगह पर आसानी से इन सबको फुरसत के क्षणों में पड़ पाऊं

अभी आगे मैं अपनी सारी कृतिया यहाँ पोस्ट करूँगा !

-एन के जे