Pyar Se Pyara Pyar
तेरे बिना यह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सूनी लागे रे
तेरे बिना यह आà¤à¤–े सारी रात जागे रे
जहा देखॠउठा के नज़र
हर चेहरा तेरा चेहरा लागे रे
मोहबà¥à¤¬à¤¤ की इनà¥à¤¤à¥‡à¤¹à¤¾ महसूस करते है
तेरे बिना à¤à¤• à¤à¤• पल
कई कई बार मरते है
अपना सब कà¥à¤› देदॠआपको
मेरे आंसू ना चले जाठडरते है
मेरा पà¥à¤¯à¤¾à¤° दूर है
कà¥à¤› खटà¥à¤Ÿà¥€ कà¥à¤› मीठी बातों के साथ
यह दिल कà¥à¤¯à¤¾ चाहे
बस दो घड़ी अपने पà¥à¤¯à¤¾à¤° से मà¥à¤²à¤¾à¥˜à¤¾à¤¤
लेकर उसका हाथो में हाथ
चार पल पà¥à¤¯à¤¾à¤°à¥€ बात
पूरी रात
फूलों में खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ है
मेरी जान सा कहाà¤
फिजाओ में रंगत है
मेरी जान सा कहाà¤
दरिया सा दिल
मेरी जान सा कहाà¤
चाà¤à¤¦ की चांदनी
मेरी जान सा कहाà¤
ज़िंदगी के मायेने बदले
जब तà¥à¤® मिले
चेहरे ने रंग बदले
जब तà¥à¤® खिले
छोड़ के दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सारे गिले
आओ à¤à¤• सपना देखे
जहाठआà¤à¤–ें बतियाये
और हो होंठसिले
तेरी आंखो में डूब जाना चाहता हूà¤
तेरे होंठो का सारा रस पी जाना चाहता हूà¤
खो जाऊठइस पल में इस तरह की
यह पल तेरे पलको में जी जाना चाहता हूà¤
-à¤à¤¨ के जे

thats truly said Nitin..but why is it so that the feeling are which u have described are always from one side,..thats a general concept to be seen everywhere..but as u said
मेरा पà¥à¤¯à¤¾à¤° दूर है
कà¥à¤› खटà¥à¤Ÿà¥€ कà¥à¤› मीठी बातों के साथ
thats truly said Nitin..but why is it so that the feeling are which u have described are always from one side,..thats a general concept to be seen everywhere..but as u said
मेरा पà¥à¤¯à¤¾à¤° दूर है
कà¥à¤› खटà¥à¤Ÿà¥€ कà¥à¤› मीठी बातों के साथ
कà¥à¤¯à¤¾ बात है नितिन à¤à¤¾à¤ˆ.. बहà¥à¤¤ रोमांटिक सी कविता लिखी है..
आज à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤° कैसे उमड़ पड़ा??
वैसे अगर à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में डालने की बात है उस लिहाज से कविता अचà¥à¤›à¥€ है.. कà¥à¤› पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ काफी अचà¥à¤›à¥€ हैं..
पर यदि कविता की बात करें तो कसावट बाकि है..
नीचे की लाइन में:
फूलों में खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ है
मेरी जान सा कहाà¤
फिजाओ में रंगत है
मेरी जान सा कहाà¤
दरिया सा दिल
मेरी जान सा कहाà¤
चाà¤à¤¦ की चांदनी
मेरी जान सा कहाà¤
फूलों की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚, फिजाओं की रंगत. चाà¤à¤¦ की चाà¤à¤¦à¤¨à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤²à¤¿à¤‚ग है.इसलिये “सा” की जगह “सी” आयेगा…
कà¥à¤¯à¤¾ बात है नितिन à¤à¤¾à¤ˆ.. बहà¥à¤¤ रोमांटिक सी कविता लिखी है..
आज à¤à¤¸à¤¾ पà¥à¤¯à¤¾à¤° कैसे उमड़ पड़ा??
वैसे अगर à¤à¤¾à¤µà¥‹à¤‚ को शबà¥à¤¦à¥‹à¤‚ में डालने की बात है उस लिहाज से कविता अचà¥à¤›à¥€ है.. कà¥à¤› पंकà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ काफी अचà¥à¤›à¥€ हैं..
पर यदि कविता की बात करें तो कसावट बाकि है..
नीचे की लाइन में:
फूलों में खà¥à¤¶à¤¬à¥‚ है
मेरी जान सा कहाà¤
फिजाओ में रंगत है
मेरी जान सा कहाà¤
दरिया सा दिल
मेरी जान सा कहाà¤
चाà¤à¤¦ की चांदनी
मेरी जान सा कहाà¤
फूलों की खà¥à¤¶à¤¬à¥‚, फिजाओं की रंगत. चाà¤à¤¦ की चाà¤à¤¦à¤¨à¥€ सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€à¤²à¤¿à¤‚ग है.इसलिये “सा” की जगह “सी” आयेगा…